Friday, August 10, 2007

Letter from a developer to his Project Leader.

चुपके चुपके रात दिन software बनाना याद है
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|

तुझसे difficulty पूछ्ने के लिये वो बेबाक हो जाना मेरा
और फ़िर दिनभर तेरा, वो मुँह छिपाना याद है|
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|

खींच लेना वो तेरा schedule का buffer दफ़्फ़तन
और मेरा दाँतों में वो, उँगली दबाना याद है|
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|

delivery के time में installer बनाने के लिये
वो मेरा company में, भुके पेट आना याद है|
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|

बेरुख़ी के साथ लिख्नना RA-sheet का review comment
और तेरा coding-time में, वो bug दिखाना याद है|
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|


एक शेर जो मैने पहले publish नहीं कराया था :-)

वक़्त-ए-resignation counter-offer का package देने के लिये
वो तेरा exit-interview में, HR को मनाना याद है|
हमको अब तक development का वो ज़माना याद है|

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Vocabulary:
बेबाक = outspoken
दफ़्फ़तन = suddenly
बेरुख़ी = ignorance
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Original Gazal : चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
Lyriced By : हसरत मोहानी
Voiced By : गुलाम अली, जगजीत सिंह